
नियम 5–10 KM की सीमा का, लेकिन 20 KM दूर शिक्षक को हॉस्टल का प्रभार! गौरेला में व्यवस्था पर बड़े सवाल
गौरेला पेंड्रा मरवाही। गौरेला विकासखंड में प्रभारी हॉस्टल अधीक्षक की नियुक्तियों को लेकर आदिवासी विकास विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभागीय नियमों में जहां हॉस्टल के निकट, लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में पदस्थ कर्मचारी को प्रभारी अधीक्षक बनाए जाने की व्यवस्था बताई जाती है, वहीं कई मामलों में करीब 20 किलोमीटर दूर पदस्थ शिक्षक को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षक को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अपने मूल विद्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य है और VSK EP पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति भी दर्ज करनी होती है, तब वह 20 किलोमीटर दूर स्थित हॉस्टल का संचालन कैसे करेगा?
हॉस्टल अधीक्षक की जिम्मेदारी केवल नाम मात्र की नहीं होती। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, अनुशासन, स्वास्थ्य, रात्रिकालीन निगरानी और आपात स्थिति में तत्काल उपलब्ध रहना इस पद की मूल जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में दूरस्थ स्कूल में पदस्थ शिक्षक को हॉस्टल का अतिरिक्त प्रभार देना व्यवस्था की व्यवहारिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

अब आदिवासी विकास विभाग पर से सवाल हैं…? – यदि नियम 5–10 किलोमीटर के भीतर से प्रभारी बनाने का है, तो 20 किलोमीटर दूर पदस्थ शिक्षक को प्रभार किस आधार पर दिया गया? – क्या विभाग ने अपने ही नियमों को दरकिनार किया है?- विद्यालय और हॉस्टल दोनों जगह एक साथ उपस्थिति कैसे सुनिश्चित होगी?- यदि हॉस्टल में कोई अप्रिय घटना होती है, तो जवाबदेही किसकी होगी?
यह मामला केवल एक नियुक्ति का नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। अब शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किस नियम और किस आवश्यकता के तहत 20 किलोमीटर दूर पदस्थ शिक्षक को प्रभारी हॉस्टल अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
















